पोषाहार- मिड डे मील वागडी कविता
पोषाहार---मिड डे मील
स्कुल मय आवियो मिड डे मील
खुली गई खावा रादवा नी मील
टन टन टन वाजी घण्टी
दौड़ी ने आवे कांति बंटी
(सब्जी)हांणा नु हु केवु
आल गोबी टमाटर
कारेक भेड़ा --कारेक रेगणअ
ने ते पसे बारे मईना
वापरअ आलू
ने मलइयो तो वगारअ पाणी।
अड़द संणा तुवर ने
मोगवारी ना मोग
सब नो हवाद अलग।
जारे सब मली ने बने
तो एनो जायकों अलग।
बाटी नी तो वात न्यारी
कारे ने बरे सांण माते
कारेक पाणी मय उकरे
ते कारेक तेल मय छम छम करे।
भात केशरिया बने जारे
गाम मय वगार नी जाए वाना
बढ़िया खाता पोषाहार
कारे ने थाता बीमार।
ते सरकारे मोटा ताजा थावा
हारू करियो सालू दूध
सोपअ ढाढअ:करते हेलु
वेसाय --दूध।
डेरी वारा ने आवियो मजो
जारे स्कुल मय आवियो दूध
सौरअ हारू वीवा वाजै
ने माड़ साब हारू काट्टू वाजै।
स्कुल मय आवियो मिड डे मील
खुली गई खावा रादवा नी मील।
हूं करे ने हूं ने करे
हमज ना खेल न्यारा हैं।
लेखक
वागड़श्री भूपेन्द्र सिंह देवलां
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| भूपेन्द्र सिंह देवलां |

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