जे थाय ई बडिया बल्ले थाय...(वागड़ी कहानी)
एक राजा अतो और अेनो एक सेनापति अतो, बे जना जणा नी अच्छी दुस्ती अती, बे जणा हमेशा हाथे रेता। दाडा में एक वगत हाथे खवानु खाता।
सेनापति भगवान माते खुब भरोसो राकतों तो मतलब पाॅजिटिव सोच वारो अतों। कोई भी थातु तो ई के तो के ‘‘खुब अच्छु थ्यु - खुब अच्छु थ्यु’’। सेनापति हमेशा हर वात में आमस केतो।
एक वगत राजा ए नवी तलवार बणा वाडी, कारीगर तलवार लई नी राजा ने बताडवा आव्यों। राजा मन गमती तलवार जुई ने राजी थई ग्यों। पसे सेनापति ने पुस्यु के - ‘‘ सेनापति जी आ तलवार किवी है?‘‘
सेनापति भी खुब राजी थई ग्यो अने केवा लाग्यो के - ‘‘आ तलवार खुब असल हे और तमारा हाथ में आवी ने खुबस बडिया लागी रई है।’’
आ वाते करता ता ऐटला में राजा ने हाथ में थकी आ तलवार सुटी गई और ऐणाना पोग उपर पडी गई जेणे थकी राजा साहब नी आंगरी कपाई गई।
आटलू थाता ती मी सेनापति केवा लाग्यो के - ‘‘खुब अच्छु थ्यु - खुब अच्छु थ्यु’’-2
आटलु हामरी ने राजा केवा लाग्यो के - ‘‘मारे पोग नी आंगरी कपाई गई नी तमे कई रया हो के खुब अच्छु थ्यु। तोय पण सेनापित ऐमस केवा लाग्यो के ‘‘खुब अच्छु थ्यु - खुब अच्छु थ्यु’’-2।
राजा अवे गुस्सो आवी ग्यो अने केवा लाग्या के - ‘‘आणा पागल सेनापति ने लईजो आय थकी और जेल में बन्द कर दो’’
आटलु थवा बाद भी सेनापति आस केवा लाग्यो के -‘‘खुब अच्छु थ्यु - खुब अच्छु थ्यु’’-2।
राजा केई रयो है के आ सेनापति वास्तव में पागल थई ग्यो है।
पसे थुडाक समय बाद राजा शिकार करवा ग्यो, दुर जंगल में जाते-जाते ई रस्तो भुली ग्या और ऐणना सैनिक भी के सीटी पडी गया। अवे राजा ऐकलो-ऐकला फरवा लाग्यो और विशार करें के अवें हूँ करू मु।
ऐटला में ऐणा जंगल मय आदिवासी कबिला ना लोग गावी ग्या और राजा ने पकडी लीदो और ई आदीवासी ऐणानी भाषा में ‘‘हुम्बा-हुम्बा हू- हुम्बा-हुम्बा हू’’ करी रया ता राजा अवे बीवा लाग्यो तो। सब आदिवासी मली ने ऐणा राजा ने देवी नी बली आल ऐम करनी ने लई ग्या।
अवे राजा अजी घबरावा लाग्यो और मन में भगवान थकी प्रार्थना करवा लाग्यो के- ‘‘हे भगवान मने बसावी लो’’
अवे राजा नी बली आलवा नी तैयारी थयी उेना सब कपडा काडी नाक्या। पसे ऐने स्नान करावी रया ता तारे एक आदिवासी नी नजर ऐनी कपाईली आंगरी उपर पडी। तो ई आदिवासी केवा लाग्यो के आनी बली नी आली सकाय आ इंसान तो खण्डित है, अटले आनी बली नी आली सकाय। आम करनी सब आदिवासी मली ने राजा ने सुडी दिदो। राजा ऐये थकी निकरी ने जेमतेम ऐना महल हुदी पुग्यो। महल में जाई ने तरत ऐणे पेले क्यु के पेला सेनापति ने पासो आय लावो।
सेनापति ने राजा ने हामे लाव्या और राजा ऐणा सेनापति राजा केवा लाग्यो के सेनापति तारि वात हासी निकरी ‘‘अगर मारी आंगरी कपाईली नी होती तो आजे मु मरी जातो और आदिवासी लोग मारी बलि सडावी देता।‘‘
पसे फेर राजा केवा लाग्यो के- ‘‘सेनापति मैं तने जेल में बन्द करयो तारा हाते हू अच्छु थ्यु?’’
सेनापति केवा लाग्यो के- ‘‘महाराज अगर मने जेल मी बन्द नी करयो होता तो मु तमारा हाते शिकार करवा आवतो और तमे तो खण्डित हो ऐम करी नु सुटी ग्या और ई आदिवासी लोग मारी बलि सडावी देता अटले मारा बल्ले भी खुब अच्छु थ्यु है।
अटले जे भी थाय ई बडिया बल्ले थाय कारी भी निराश नी थावु।
संकलन तथा वागडी रूपांतरण
श्री लक्ष्मण दास वैष्णव
रंगथौर (डूंगरपुर)
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| लक्ष्मण दास वैष्णव |

आकी रातर धुणीया तोय लालिया ने लालिया😁😁
जवाब देंहटाएंṅıċє ṡıя jı
जवाब देंहटाएंNice guruji :)
जवाब देंहटाएंमस्त लखयु है।
जवाब देंहटाएंमस्त लखयु है।
जवाब देंहटाएंNice sir
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