वागड़ी कहावतें भाग - 5
1 - गदेड़ कुटय ने राकुडो उड़यों - (किसी बात का कोई असर न होना)
2 - गदेड़ा ने खुटे गाय बांदो तो सट्टे दाडे भूके - (संगति का असर जरूर होता हैं)
3 - मरे ऐये कुण हुवे - (तत्काल आवश्यकता होना)
4 - पाणा नी उतावरे कपार नी फुड़ाय - (किसी काम में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए)
5 - सुणकी भरे वैर नी मटे - (कम आघात से दुश्मनी नहीं मिटती)
6 - राणी ने काणी नी केवाय - (उच्च व्यक्ति को बुरा नहीं बोल सकते)
7 - फरे ई सरे, बांदयु भुकु मरे - (मेहनत करता है वो ही फल पाता हैं)
8 - आकि रातर धुण्या रया लालिया ने लालिया - (मेहनत के पश्चात् को लाभ नहीं होना)
9 - ऊजोड़ गाम मय अरण्डो राजा - (अनपढ़ो में एक पढ़ा लिखा)
10 - मरती वेरा लो भबा खिसड़ी - (अंत समय में फायदे बताना)

Varta
जवाब देंहटाएंRahul nanoma
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