मोरन नदी के किनारे विराजमान है जागेश्वर महादेव... जुलाई 27, 2020मोरन नदी के किनारे विराजमान है जागेश्वर महादेव... वैसे तो वागड़ (डूंगरपुर-बांसवाड़ा) लोढ़ी काशी के नाम से जाना जाता है क्योकि यहाँ पर आपको...Read More
वागड़ महोत्सव नवंबर 08, 2019 पिछले 20 वर्षों से डूंगरपुर ज़िले का गौरव रहा है वागड़ महोत्सव छायाचित्र : कुणाल स्टूडियो, डूंगरपुर 1996 में तत्कालीन जिला क...Read More
काट्टा (मृत्युभोज) नो श्राप... अक्टूबर 22, 2019 जेणा आंगणा मय बैटा ना दुःख थकी आई अकराई रई है, ऐये जाई ने तमने हवाद हरते भावे, धणी ना दुःख मय खुणे बैटी राडी बाई रुवे ऐणा आंगणा माते...Read More
गूंगा दर्शक बण्ये, काम ने बणे कएंक करवू पड़े...(गूंगे दर्शक बने, काम नहीं बनेगा कुछ करना पड़ेगा) अक्टूबर 19, 2019 दरेक क्षेत्र में थई रया थका प्रयोग, ने विकास ताजी वात है। वदारे थकी वदारे योजनाएं जाजी भावना ने लई ने बणावी लएं है। ई जुदी वात है के थोड...Read More
वगर बुद्धि नी तोमडी...(वागडी निर्गुणी भजन) अक्टूबर 12, 2019 1. वगर बुद्धि नी तोमड़ी तो नीत गंगा में नावें ---2 मईला रे परदा खुल्या वना तो कदी न मिठी थावें। रामा भुली रे हाँ ऽऽऽऽऽऽऽ, दाता आनो...Read More